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तेरी उल्फ़त में

तेरी उल्फत में | वह पहली मोहबत की झलक और कामयाबी की पहल!। क़िस्त 03

रूबी की तन्हाई और ख़ामोश दर्द, सिमरन की चंचलता और राज का नया सफ़र। पढ़िए तेरी उल्फ़त में की तीसरी क़िस्त, पहली मोहब्बत की झलक और कामयाबी की पहल।

तेरी उल्फत में  वह पहली मोहबत की झलक और कामयाबी की पहल! क़िस्त 03

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा

अरसलान बोला “हां भाई सिमरन जी से अपने दिल की बात कैसे कहोगे … श्रीमान आशिक।”

राज बोला “तुम दोनों मेरी खिंचाई बंद करो। मैं तो वैसे ही पागल हो गया हूं, कुछ समझ नहीं आ रहा, यारों। पता नहीं कैसे बात बढ़ेगी।”

न्यूटन बोला “यार तू तो गया।” फिर वह गाने लगा “अब मुझे रात दिन तुम्हारा ही ख्याल है, क्या करूं प्यार में दीवानों जैसा हाल है।”

अरसलान भी उसकी ताल में ताल मिलाने लगा और राज बेचारा चुप-चाप बैठा दोनों को घूरता रहा।

सही वक्त पर सब ऑफिस पहुंचे। सब कॉन्फ्रेंस रूम में बैठे हुए थे, तभी सिमरन अंदर आई।

“गुड मॉर्निंग एंड वेलकम टू सीडब्ल्यूएस ग्रुप। मुझे आशा है कि आप सभी के पास यहां एक प्रोडक्टिव और अच्छा समय होगा।”

सबने बोला “थैंक्स सिमरन मैम।”

सिरमन बोली “पहली बात, मैं मैम नहीं हूं। हम सब एक ही उम्र के हैं, और वैसे भी हम लोग एक दूसरे के नाम से ही एक दूसरे को पुकारते हैं। और मैं कोई बहुत पुरानी तो हूं नहीं। सीडब्ल्यूएस के ओल्ड ऑफिस को तीन महीने पहले ज्वॉइन किया था, न्यू ऑफिस में रिक्वायरमेंट थी तो मुझे यहां भेज दिया गया। तो यार आप सब मुझे दोस्त की तरह ट्रीट करो, सही रहेगा। बाकी काम में मजा भी आएगा।” सब बोले “जी बिल्कुल सही है सिमरन।”

फिर सिमरन उनको काम की डिटेल्स देने लगी। वहां वो सब क्या करते हैं। सब ध्यान से उसकी बात सुन रहे थे। राज फिर सिमरन को ही निहार रहा था। उसकी हर बात उसे अच्छी लग रही थी, अपने ही ख्यालों में था कि तभी सिमरन ने राज से कहा “राज तुम्हें कुछ पूछना है। तुमने अभी तक कोई बात नहीं की।” राज फिर हड़बडा गया “नहीं सिमरन जी मुझे सब समझ आ रहा है।”

सिमरन ने राज को देखा फिर बोली “सिमरन जी से आपका मतलब?” राज फिर बोला “सॉरी सिमरन जी मतलब सिमरन।”

सिमरन मुस्कुरा दी और फिर बोली “चलो सब लोग एक ब्रेक लेते हैं, पहले दिन इतना ज्यादा काम सही नहीं। आओ सब कैफेटेरिया में, चाय वगैरह पी लेते हैं।”

कैफेटेरिया में सब लोग चाय कॉफी के साथ नॉर्मल बात कर रहे थे। इसी तरह पूरा टाइम निकल गया। शाम को ऑफिस से निकलते हुए। सिमरन परेशान सी दिख रही थी। वह उनके पास पहुंची और बोली, “पता नहीं मेरी स्कूटी को क्या हुआ है, स्टार्ट नहीं हो रही। और यहां आस-पास कोई मैकेनिक भी नहीं मिलता।” इस पर रोहित बोला, आप कहां रहती हैं?

सिमरन ने ऐड्रेस बताया, तो रोहित ने बोला “देखिए आज राज को उस तरफ काम भी है। आप एक काम कीजिए, आप राज के साथ मेरी गाड़ी में चली जाइए। मैं आपकी स्कूटी को चेक करवा लेता हूं। कल आप ले जाइएगा। बिल्डिंग के गार्ड को बता देते हैं।” सिमरन ने राज को देखा तो वह फिर घबरा गया।

कहानी जारी है, अगले सफ़े पे