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तेरी उल्फ़त में

तेरी उल्फत में | वह पहली मोहबत की झलक और कामयाबी की पहल!। क़िस्त 03

रूबी की तन्हाई और ख़ामोश दर्द, सिमरन की चंचलता और राज का नया सफ़र। पढ़िए तेरी उल्फ़त में की तीसरी क़िस्त, पहली मोहब्बत की झलक और कामयाबी की पहल।

तेरी उल्फत में  वह पहली मोहबत की झलक और कामयाबी की पहल! क़िस्त 03

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा

“चांडाल चौकड़ी ! कूल है, ठीक है मुझे तुम लोगों के साथ अच्छा लगेगा।”

राज बोला “श्योर, चलो चलता हूँ।”  फिर मुस्कुराते हुए बाहर निकला। कार में बैठते हुए उसने देखा कि सिमरन उसे बाय कर रही थी। राज ने भी उसे बाय किया और फिर कार घर की तरफ बढ़ा दी।

राज सोचने लगा कि कितनी अच्छी और सच्ची है दिल से यह। कोई छल नहीं, बिल्कुल सादगी से रहती है, चंचलता है। पर जिंदगी को सीरियसली लेती है। शायद यही है वह लड़की जिसको वह ढूंढ रहा था। फिर सोचा, सिमरन तुम काफी अकेले रह ली हो, अब ज्यादा देर तुम्हें अकेला नहीं रहना पड़ेगा। और तस्वीरों से बात नहीं करनी पड़ेगी। जल्द ही तुमको ले जाऊंगा अपने घर। राज मुस्कुराते हुए आगे बढ़ गया।


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