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तेरी उल्फ़त में

तेरी उल्फत में | वह पहली मोहबत की झलक और कामयाबी की पहल!। क़िस्त 03

रूबी की तन्हाई और ख़ामोश दर्द, सिमरन की चंचलता और राज का नया सफ़र। पढ़िए तेरी उल्फ़त में की तीसरी क़िस्त, पहली मोहब्बत की झलक और कामयाबी की पहल।

तेरी उल्फत में  वह पहली मोहबत की झलक और कामयाबी की पहल! क़िस्त 03

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा

मेजर शेखर “भाई मैंने तुम सबके सारे किस्से सुने हैं, राज बताता रहता है। तुम्हारे एक्सीडेंट का भी पता चला, पर बेटा उस वक्त मैं शहर में नहीं था। इसलिए तुम्हें देखने नहीं आ पाया।”

तभी रूबी भी वहां आ पहुंची, सबने उसे घेर लिया। रोहित बोला “दीदी बताएं हम सब आज यहां इखट्टा किस लिए हुए हैं।”

रूबी बोली “मुझे नहीं पता, पर मैं काफी जरूरी काम छोड़कर आई हूं। अगर बेकार की बात हुई तो मैं तुम्हारा बैंड बजा दूंगी।”

हिना बोली “वक्त नहीं बेकार होगा आपका, ज़रा इन इन्वेलप्स को तो देखिये।” रूबी ने एक लिफाफे को देखा फिर बाकी को देखा, उसके चेहरे पर खुशी झलकने लगी।

तभी मेजर शेखर बोले “रूबी बेटा कैसी हो, बड़े दिन बाद यहां आई हो, वह भी सबकी वजह से, अपने अंकल की याद नहीं आती तुमको कभी।”

रूबी बोली “नहीं अंकल यह बात नहीं है, आप को कैसे भूल सकती हूं, बस मसरूफियत ज्यादा है।”

रूबी झुक कर मेजर शेखर का आशीर्वाद लेने लगी तो मेजर शेखर ने उसे रोकते हुए बोला “अरे बेटी की जगह कदमो में नहीं दिल में होती है,” यह कहकर उसे प्यार से गले लगा लिया।

फिर मेजर शेखर ने पूछा “और बताओ बेटा जावेद कैसा है, काफी टाइम से आया नहीं।”

रूबी का चेहरा मुर्झा गया। वह कुछ ना बोली। मेजर शेखर बोले “यानी अभी तक ……………….”

तभी हिना बोली “चलो नाश्ता तैयार है। जल्दी आ जाओ सब।” रूबी उस तरफ चली गई। मेजर शेखर उसे देखते रहे, उनकी आंखों में अफसोस था।

अरसलान ने दोनों की बातें सुन ली थी। उसे भी गहरा धक्का लगा। फिर वह भी सबके पास चला गया।

देर शाम तक सब लोग साथ रहे, फिर सब अपने अपने घर को चले गए। अरसलान और न्यूटन राज के कहने पर राज के साथ ही उसके घर रुक गए।

रात में अरसलान ने राज से पूछा, “राज यह जावेद कौन है। रूबी आपा का उनसे क्या रिश्ता है?”

राज ने जवाब दिया “वह उनके हसबेंड हैं। वह अलग रहते हैं। दोनों में लड़ाई हो गई है। एक साल होने वाला है।”

न्यूटन बोला “लड़ाई तो बस एक बहाना है। वह तो किसी दूसरी लड़की के साथ रहते हैं।”

अरसलान बोला “कौन है वह लड़की?”

राज ने बताया “पता नहीं, कोई है, पर उस चक्कर में दोनों का अच्छा खासा संसार खराब हो गया है। शादी के बाद दोनों काफ़ी खुश थे। शादी के एक साल बाद यह लड़की जावेद जी से टकरा गई और तभी से…”

फिर कुछ सोचते हुए अरसलान बोला “हम लोगो को उस लड़की का पता लगाना पड़ेगा। हम लोगों को कुछ करना होगा। ऐसे तो दो लोगों की जिंदगी खराब हो जाएगी।”

न्यूटन बोला “सही कह रहे हो, पर हम यह करेंगे कैसे?”

अरसलान बोला “पहले पता तो चले कि माजरा क्या है। पर यह बात हम तीनों के अलावा किसी और को नहीं बताना।”

फिर अरसलान ने राज से कहा “अब तेरा दो दिन बाद का क्या प्लान है?”

राज बोला “दो दिन बाद ऑफिस जाना है और क्या!”

न्यूटन जरा इत्रा कर बोला “वह तो ठीक है, सिमरन जी से क्या कहोगे राज बाबू…”

कहानी जारी है, अगले सफ़े पे