होम / तेरी उल्फ़त में / तेरी उल्फत में | वह पहली मोहबत की झलक और कामयाबी की पहल!। क़िस्त 03
तेरी उल्फ़त में

तेरी उल्फत में | वह पहली मोहबत की झलक और कामयाबी की पहल!। क़िस्त 03

रूबी की तन्हाई और ख़ामोश दर्द, सिमरन की चंचलता और राज का नया सफ़र। पढ़िए तेरी उल्फ़त में की तीसरी क़िस्त, पहली मोहब्बत की झलक और कामयाबी की पहल।

तेरी उल्फत में  वह पहली मोहबत की झलक और कामयाबी की पहल! क़िस्त 03

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा

रोहित बोला “यार राज तुमने कहा था न कि कोई काम है उस तरफ तुम्हें, मैं चला जाता पर मुझे उल्टा पड़ेगा। तुम चले जाओ। रास्ते में सिमरन को ड्रॉप कर देना, बाइक मैं लेता जा रहा हूं। कल कार लेते आना। राज कुछ समझता उससे पहले ही रोहित ने राज की तरफ कार की चाबी फेंक दी।

सिमरन कार में बैठ गई। फिर राज भी कार में बैठकर सिमरन के साथ निकल गया।

“चलो यार इसकी गाड़ी तो बढ़ी। वरना पता नहीं, कभी इसे ऐसा मौका मिलता भी कि नहीं।” रोहित हंसते हुए बोला। न्यूटन बोला “मतलब क्या है?”

रोहित बोला, “अभी समझाता हूं, जरा इधर आओ सब।” रोहित सबको सिमरन की स्कूटी के पास लेकर आया, फिर उसने झुक कर साइलेंसर से एक कपड़े का टुकड़ा निकाला जिसमें कुछ गीली मिट्टी का गोला पड़ा था। वह सबको देखते हुए बोला “कुछ समझे तुम लोग!” हिना बोली “इससे क्या समझे, जरा सही सही बता रोहित।”

रोहित बोला “बात यह है कि स्कूटी बिल्कुल सही है, बस इस कपड़े और मिट्टी के ढेले की वजह से नहीं स्टार्ट हो रही थी, पुराना आइडिया है, आलू, आटे का पेड़ा या मिट्टी का ढेला बनाकर गाड़ी के साइलेंसर में फंसा दो तो गाड़ी स्टार्ट नहीं होती। मैंने मौका देखकर यही किया। ताकि हमारे राजा बाबू को थोड़ा सा समय सिमरन जी के साथ अकेले मिल जाए। ताकि वह बेचारा कुछ बात तो कर ले सिमरन से। “सब हसने लगे, फिर सना बोली” तो ये सब तेरी करस्तानी है। पर अगर उसने कुछ नहीं बोला या बात नहीं की तो?”

“तो उसका कुछ नहीं होने वाला। तब उसे भगवान भरोसे छोड़ना पड़ेगा।” रोहित बोला।

सना बोली “मान गए रोहित तेरे को, खाने के अलावा तुझे और भी कुछ सूझने लगा है।”

इसपर सब हंस पड़े। फिर गार्ड को बताकर वो सब भी वहां से चले गए।


वोह ग़ैर मुतवका लेकिन एक रूमानी सफर!

रास्ते में, राज चुप चाप गाड़ी में बैठा ड्राइव कर रहा था। सिमरन बोली “राज थैंक्स, वैसे क्या काम है तुमको वहां पर?” राज हड़बड़ा कर बोला “वो… वो कुछ खास काम नहीं, बस मंदिर जाना है मुझे।”  उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था।

सिमरन बोली “तुम सिर्फ़ मंदिर जाने के लिए इधर आ रहे हो, कोई खास बात है क्या? मंदिर तो तुम कहीं भी जा सकते हो।” राज “वो मैंने वहां पर पहले मन्नत मांगी थी, कि अगर मुझे जॉब मिलेगी तो मैं यहां आऊंगा।”

सिमरन बोली “ओह! अच्छा, अगर तुमको कोई प्रॉब्लम न हो तो मैं भी मंदिर चल सकती हूं तुम्हारे साथ, कई दिन हुए मुझे भी मंदिर गए हुए। वैसे कौन से मंदिर में जाना है?”

राज बोला “हां, चलिये मुझे क्या इश्यू होगा।  मंदिर तो सभी जाते हैं, आप भी चलिए। यहां पास के मनिक मंदिर जाना है।”  राज अब मन ही मन में रोहित को कोस रहा था कि कहां फंसा दिया।

कहानी जारी है, अगले सफ़े पे