तेरी उल्फत में | वह पहली मोहबत की झलक और कामयाबी की पहल!। क़िस्त 03
रूबी की तन्हाई और ख़ामोश दर्द, सिमरन की चंचलता और राज का नया सफ़र। पढ़िए तेरी उल्फ़त में की तीसरी क़िस्त, पहली मोहब्बत की झलक और कामयाबी की पहल।

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा
सिमरन बोली “क्या हुआ। तुमने कार क्यों रोक दी।” राज उतरा और फिर सिमरन की तरफ जाकर दरवाजा खोलते हुए बोला, “सिमरन साहिबा क्या आप मेरे साथ एक चोकोबार आइसक्रीम खाने की तकलीफ करिएगा।”
सिमरन बोली “हां पर मैं दो खाउंगी, और साथ में मुझे एक दो फ्लेवर और खाने हैं।” राज बोला “जी बिल्कुल पर एक शर्त है, कि आप मेरा सर नहीं तोड़ेंगी।” सिमरन ने हंसते हुए कहा “उसके बारे में मैं बाद में सोचूंगी। चलो पहले हम आइसक्रीम खाते हैं।”
फिर वो आइसक्रीम की दुकान में चले गए। वहां जाकर उन दोनों ने ऑर्डर दिया और फिर एक टेबल पर बैठ गए। फिर टेबल पर आइसक्रीम आ गई और उसे खाते हुए दोनों और बातें करते गए। राज सिमरन को देखता रहा, उसकी बातें, हंसी हर अदा उसे पसंद आने लगी थी। फिर थोड़ी देर बाद वह दोनो वहां से निकले।
सिमरन का घर और उसका अकेलापन
अब राज सिमरन से काफी नॉर्मली बात कर रहा था। फिर उसने सिमरन के घर के आगे गाड़ी रोकी। सिमरन उतर कर बोली “थैंक्स राज फॉर लिफ्ट एंड आइसक्रीम, मजा आ गया, अंदर चलो मैं तुमको अपने दादाजी से मिलवाती हूं।”
राज बोला “फिर कभी, आता हूं आज देर हो जाएगी।”
सिमरन बोली “नहीं आज ही, वरना मैं सर तोड़ दूंगी तुम्हारा।” सिमरन ने राज की तरफ का दरवाजा खोला और उसे बाहर आना ही पड़ा।
राज बोला “अगर अपने सर से मुझे मोहब्बत ना होती तो ना चलता आज।”
दोनो हंसते हुए अंदर दाखिल हुए। सिमरन दादू दादू कहते हुए, अंदर आई। हॉल में एक बड़ी सी तस्वीर लगी थी, जिसके पास आकर सिमरन ने झुक कर प्रणाम किया।
फिर पलट कर बोली “राज यह है मेरे दादू।”
राज बोला “पर यह तो…”
सिमरन मुस्कुराकर बोली “हां दो साल पहले यह दादी और मॉम डैड के पास चले गए, पर यह हमेशा मेरे पास ही रहते हैं। मैं इनको सब कुछ बताती हूं।”
राज बोला “आपके माता-पिता कब ………”
सिमरन बोली “मुझे वो तो याद नहीं। दादा दादी ने ही पाला था, दादी जब मैं 15 साल की थी तो चली गई, फिर दादू भी, पर मुझे लगता है कि वह हमेशा मेरे साथ रहते हैं।”
“पर आपको अकेले डर नहीं लगता यहाँ।” राज ने कहा तो सिमरन बोली “भूल गए, मुझे मार्शल आर्ट आती है।”
राज हंसने लगा, तो सिमरन भी हंसते हुए बोली, कि यहां पास में सब अच्छे लोग हैं, कोई परेशानी नहीं आती।
फ़िर सिमरन बोली “लो मैंने तुमको चाय या कॉफ़ी के लिए तो पूछा भी नहीं।”
राज बोला “वह मैं दूसरी बार आऊंगा तो पी लूंगा, क्योंकी आइसक्रीम कुछ ज्यादा हो गई है। अब मैं चलता हूं, अपना ख्याल रखना। कल ऑफिस में मिलते हैं।”
“ठीक है, लिफ्ट और आइसक्रीम के लिए शुक्रिया।” सिमरन मुस्कुरा कर बोली।
“हम दोस्तों के बीच सॉरी और थैंक्स की जगह नहीं है। और अब तुम भी हमारी दोस्त हो। वेलकम टू अवर टीम। कॉलेज में हमारी टीम चांडाल चौकड़ी के नाम से फेमस है।”
कहानी जारी है, अगले सफ़े पे