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आख़िरी कॉल: एक अधूरी मोहब्बत का इंसाफ़

मौत के बाद भी अगर मोहब्बत कोई रास्ता ढूँढ ले, तो कैसा हो? रेहान और ज़ोया की एक ऐसी दास्तान, जिसमें एक आख़िरी कॉल ने पूरे राज़ को बेनक़ाब कर दिया। पढ़िए।

ज़ोया अकेली अंधेरे कमरे में फ़ोन थामे, आख़िरी कॉल की दास्तान

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा

डायरी में आगे लिखा था, बरसों बाद, बैंक के एक ज़ोनल ऑडिट के सिलसिले में रेहान का सामना फ़वाद से हुआ, रेहान ने तो उसको नहीं पहचाना पर फवाद की जलन फिर ज़िंदा हो गयी । फ़वाद अब उसी बैंक की एक दूसरी ब्रांच में काम कर रहा था। ऑडिट करते-करते रेहान को एक बड़े फ़ाइनेंशियल फ्रॉड के सबूत मिलने लगे, और उन सबूतों की डोर सीधा फ़वाद तक जाकर टूटती थी। डायरी के आख़िरी पन्नों पर रेहान ने लिखा था कि उसे शक़ है, इस फ्रॉड के पीछे फ़वाद अकेला नहीं, कोई और भी है, कोई ताक़तवर शख़्सियत, जिसका नाम अभी साफ़ नहीं हुआ, पर जिसका रसूख़ पॉलिटिक्स के गलियारों तक फैला लगता है।

रेहान ने फवाद को एक दिन अकेले में रोका और सच जानना चाहा, क्यूंकि पिछले कुछ दिन से फवाद काफी दोस्ती भरे लहजे से उसके साथ बात कर रहा था, और सीधा और सच्चा रेहान ने फवाद की बेहतरी के लिए उससे यह मसला डिसकस किया, पर इस बात ने फवाद के असली रंग बयां कर दिए ।

यहाँ कुदरत को कुछ मंज़ूर था, रेहान का पॉकेट रिकॉर्डर और डायरी, जो ज़ोया को बाद में रेहान के मरने के बाद होटल वालों ने जहाँ वह तेहरा था, उसको लौटाई थी, उस दौरान रिकॉर्डर कब ऑन हुवा, रेहान को नहीं पता चला।

रिकॉर्डर में फ़वाद की वह धमकी भरी बातचीत रिकॉर्ड थी, जिसमें वो रेहान को चुप रहने की हिदायत दे रहा था, वरना अंजाम बुरा होगा। ज़ोया के हाथ काँप रहे थे, पर उसके इरादे अब पहले से कहीं ज़्यादा मज़बूत थे। वो ये सब लेकर सीधा इंस्पेक्टर सुनील के पास पहुँची।


बेनक़ाब

रिकॉर्डिंग और डायरी के सबूतों के साथ बैंक की इंटरनल ऑडिट टीम भी जाँच में शामिल हुई। धीरे-धीरे फ़्रॉड का पूरा जाल सामने आने लगा, हर ट्रांज़ैक्शन, हर फ़र्ज़ी साइन, हर वो रकम जो किसी अनजान खाते में ग़ायब होती रही थी। और उसकी परतें उधेड़ते-उधेड़ते, आख़िरकार वो “ताक़तवर शख़्सियत” भी बेनक़ाब हो गई, अलिशबा, जो अब पॉलिटिक्स और बिज़नेस के हलक़ों में अपनी अलग पहचान बना चुकी थी।

पूछताछ वाले कमरे में जब अलिशबा को बिठाया गया, उसका रुतबा, उसका ग़ुरूर, अभी भी उसके चेहरे पर तना हुआ था। “आपके पास सबूत क्या है, इंस्पेक्टर? एक मरे हुए आदमी की डायरी?” उसने तंज़ से कहा, मानो अदालत भी उसके इशारों पर चलेगी।

इंस्पेक्टर सुनील ने मेज़ पर एक फ़ाइल रख दी। “डायरी अकेली नहीं है, मैडम। बैंक ट्रांज़ैक्शंस का ट्रेल सीधा आपके एक शेल कंपनी के खाते तक जाता है। और वो रात, जब रेहान का एक्सीडेंट हुआ, आपका फ़ोन उसी हाईवे के टावर से कनेक्ट था।” कमरे में एक पल के लिए साँसें थम गईं। अलिशबा की मुस्कान पहली बार डगमगाई।

कहानी जारी है, अगले सफ़े पे