सफ़र-ए-इश्क़: एक अधूरे ख़त की दास्तान
एक पुरानी बोगी के आख़िरी सफ़र में, दो अजनबियों को मिलता है तीस साल पुराना एक अधूरा ख़त, और उसी के साथ शुरू होती है एक नई मोहब्बत की कहानी। पढ़िए।

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा
स्टेशन के बाहर भीड़ में दोनों का रास्ता अलग हो गया, रेहान अपनी टैक्सी की तरफ़ बढ़ा, अलीना अपनी तरफ़। टैक्सी का दरवाज़ा खोलते-खोलते रेहान ने एक बार पीछे मुड़कर देखा, बस इस उम्मीद में कि शायद अलीना भी उसी वक़्त मुड़े।
और वो मुड़ी। दोनों की नज़रें उस भीड़ भरे स्टेशन के बाहर, एक पल के लिए मिलीं, न कोई लफ़्ज़, न कोई इशारा, बस एक मुस्कान जो दोनों तरफ़ से एक साथ उभरी। जैसे उस पुरानी बोगी की तरह, एक कहानी यहाँ भी अपना नया सफ़र शुरू कर रही हो, बस इस बार, वह जज़्बात दराज़ में बंद रहने वाले नहीं थे।
और तुम, जो ये कहानी पढ़ रहे हो, इतना याद रखना: कुछ मोहब्बतें इसलिए अधूरी रह जाती हैं, क्योंकि हम उन्हें कहने का सही वक़्त ढूँढते रह जाते हैं। मगर कभी-कभी ज़िंदगी हमें एक और मौक़ा देती है, किसी और की कहानी के ज़रिए, बस एक पुरानी दराज़, एक भूला हुआ ख़त, और एक रात के सफ़र के रूप में।
आपको यह कहानी भी अपनी सी लगेगी ❤️