साया और मोहब्बत : एक अनसुलझी पहेली
रमेश, रागिनी और एक रहस्यमयी हवेली की कहानी, जहाँ मोहब्बत, साया और डर एक-दूसरे से जुड़ जाते हैं। पढ़िए एक अनसुलझी रहस्यमयी दास्तान।

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा
रागिनी रमेश को पुकारती है……रमेश, रमेश, रमेश! रमेश हड़बड़ा सा जाता है और चीखता है – “रागिनी, रागिनी, रागिनी”!…..इतने में उसका दोस्त बिरजू उसे संभालता है और पूछता है – “क्या हुआ रमेश?” लेकिन रमेश उसे कुछ नहीं बताता।
फिर रमेश और बिरजू उस घर को ढूंडने निकल पड़ते हैं, जिसमें उन्हें ढोल बजाना है और जहां का इन्हें Address दिया गया था। लेकिन अभी भी इन दोनों को दूर दूर तक कुछ भी दिखाई नही दे रहा था। फिर अचानक एक घर में उन्हें एक चिराग जलता हुआ दिखाई देता है, बिरजू खुश हो जाता है कि चलो कोई घर तो दिखाई दिया।
रमेश और बिरजू उस घर की तरफ चलते चले जाते हैं, लेकिन एक घंटे तक चलने के बाद भी वो घर करीब आने का नाम नहीं ले रहा था। ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई चाहता ही नहीं कि रमेश और बिरजू उस जंगल से बाहर जाएं।
आखिर में थक कर रमेश और बिरजू वहीं रास्ते में बदहवास होकर लेट जाते हैं। रमेश नींद में रहता है, तभी उसके ख्वाब में उसे रागिनी दिखाई देती है। वही सफेद साड़ी, मांग में लाल सिंदूर। वो रमेश को आगे का रास्ता बताती है। जैसे ही रागिनी उसे रास्ता बताती है, तो रमेश की आंखें खुल जाती हैं। अचानक से रमेश बिरजू से चलने को कहता है और फिर वो दोनों चिराग जल रहे घर में पहुंच जाते हैं।
चिराग वाले घर में पहुंचते ही बिरजू दरवाज़े की कुण्डी खटखटाता है, जहां से आवाज़ आती है, “आ रही हूं”। रमेश और बिरजू इंतज़ार करते हुए खिड़की से देखते हैं तो एक लड़की दूसरी लड़की की मालिश करती हुई दिखाई देती है। वो कटोरी में खून लेकर दूसरी लड़की की पीठ में मालिश करती है। रमेश और बिरजू यह देखकर दंग रह जाते हैं।
फिर अचानक से मालिश करवा रही लड़की अपनी गर्दन खिड़की की तरफ मोड़ती है और रमेश को देखती है। रमेश जब उसको देखता है तो उसमें उसे रागिनी का चेहरा नजर आता है। रमेश चौकन्ना हो जाता है कि तभी उस लड़की की शक्ल बदल जाती है। इतने में दरवाज़ा खुलता है और एक लड़की बाहर निकलकर पूछती है – “क्या हुआ, क्या काम है”? इतने में बिरजू उससे थोड़ा डरते हुए पूछता है – “ठाकुर प्रताप सिंह का घर कहां है? कल उनके बेटे की शादी है, हमें वहां ढोल बजाने के लिए बुलाया गया है”।
वो लड़की बिरजू को घर का एड्रेस बता ही रही थी कि अचानक रमेश की नज़रें उस लड़की के पैरों पर पड़ती है। रमेश की सांसें ऊपर नीचे होने लगती हैं और वो बिरजू से चलने को कहता है। बिरजू उस लड़की से एड्रेस पूछ चुका होता है। रमेश उससे दबी आवाज में कहता है – “जल्दी चलो बिरजू”। घबराया हुआ रमेश बिरजू को लेकर जैसे तैसे भागकर एक मजार पर पहुंच जाता है। मजार पर पहुंचकर रमेश चैन की सांस लेता है। तब बिरजू रमेश से पूछता है – “क्या हुआ रमेश तुम इतने घबराए हुए क्यों हो”?
कहानी जारी है, अगले सफ़े पे