साया और मोहब्बत : एक अनसुलझी पहेली
रमेश, रागिनी और एक रहस्यमयी हवेली की कहानी, जहाँ मोहब्बत, साया और डर एक-दूसरे से जुड़ जाते हैं। पढ़िए एक अनसुलझी रहस्यमयी दास्तान।

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा
तब रमेश उसे बताता है – “जिस लड़की से तुम पता पूछ रहे थे न, उस लड़की के दोनों पैर उल्टे थे, वो एक चुड़ैल थी”। बिरजू भी रमेश की बातों से थोड़ा डर जाता है। लेकिन फिर रमेश मजार से मजार का पाक पानी पीकर और उस पानी को अपने और बिरजू के ऊपर छिड़क कर बताए हुए एड्रेस पर पहुंच जाता है।
वहां पर उन्हें ठाकुर प्रताप सिंह का एक मुलाजिम मिलता है, जिसका नाम दलबीर रहता है। दलबीर रमेश और बिरजू से कहता है – “अच्छा हुआ तुम दोनों ठीक वक्त पर पहुंच गए, यहां आने में तुम दोनों को कोई परेशानी तो नहीं हुई”? रमेश और बिरजू एक दूसरे की तरफ देखते हैं, फिर दलबीर से कहते हैं – “नहीं, नहीं, बिल्कुल नहीं”।
दलबीर कुछ मुस्कुराते हुए अंदाज में उन्हें देखता। फिर उनसे कहता है – “अब मैं यहां से तुम दोनों को ठाकुर साहब के ठिकाने पर ले जाऊंगा, लेकिन उससे पहले मुझे तुम दोनों की आंखों में पट्टियां बांधनी होंगी”। रमेश और बिरजू हैरानी से दलबीर से पूछते हैं कि पट्टियां क्यों? तब दलबीर उनसे कहता है – “क्योंकि ठाकुर प्रताप सिंह नहीं चाहते कि उनका ठिकाना किसी को पता चले, इसलिए मुझे तुम दोनों की आंखों में पट्टियां बांधनी होंगी।”
दलबीर की यह बात सुनकर रमेश और बिरजू थोड़ा घबरा जाते हैं, लेकिन उनके पास कोई चारा भी नहीं होता, इसलिए वो मजबूरन दलबीर की हर बात मानते हैं। दलबीर उनकी आंखों में पट्टी बांधकर उनको ठाकुर साहब के ठिकाने पर लेकर जाता है।
ठाकुर साहब की हवेली एक खुफिया पहाड़ के अंदर बनी रहती है। वहां पहुंचने के बाद रमेश और बिरजू को पता चलता है कि वो लोग जहां ढोल बजाने आए हैं, वो एक डाकू का घर है। इतना जानने के बाद उनकी सांसें थम सी जाती हैं। लेकिन फिर मजबूरी में उन्हें दो दिन तक वहां पर रुकना पड़ता है। हवेली में भी रमेश को हर जगह रागिनी ही दिखाई देती है। जैसे रागिनी हर जगह उसका पीछा कर रही हो।
साया और मोहब्बत : रहस्यमई जंगल
ठाकुर साहब के बेटे की शादी में बाजा बजाने के बाद रमेश और बिरजू को सही सलामत वापस भेजा जाता है। जब ठाकुर साहब की हवेली से वो लोग वापस उनके मुलाजिम दलबीर के घर आते हैं, तो रात हो जाती है और फिर दलबीर उन्हें उस जंगल की कुछ रहस्यमई चीजों के बारे में बताता है।
वह कहता है कि यह कोई साधारण जंगल नहीं है, यह प्रेतात्माओं का घर है। यहां कुछ अच्छी तो कुछ बुरी आत्माएं निवास करती हैं और कुछ ऐसी आत्माएं भी हैं, जो अपने प्रेमी को खोकर बैठी हैं और प्यार की प्यासी हैं। लेकिन उनके इरादे बुरे नहीं हैं। लेकिन कुछ बुरी आत्माएं उन अच्छी आत्माओं को बुरा बनने पर मजबूर करती हैं।
बिरजू और रमेश उस मुलाजिम की बातों को गौर से सुनते हैं और फिर बातों ही बातों में पूछ लेते हैं – “इस जंगल में एक हवेली भी है ना? वहां एक लड़की रहती है। उसके अलावा वहां और कौन रहता है”?
कहानी जारी है, अगले सफ़े पे