होम / एक किस्त, एक दास्तान / साया और मोहब्बत : एक अनसुलझी पहेली
एक किस्त, एक दास्तान

साया और मोहब्बत : एक अनसुलझी पहेली

रमेश, रागिनी और एक रहस्यमयी हवेली की कहानी, जहाँ मोहब्बत, साया और डर एक-दूसरे से जुड़ जाते हैं। पढ़िए एक अनसुलझी रहस्यमयी दास्तान।

पुरानी हवेली के सामने रमेश और रहस्यमयी रागिनी की डरावनी कहानी

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा

दलबीर उनके सवालों का जवाब देते हुए कहता है – “वो हवेली तो सालों से खाली पड़ी है। वहां कोई भी आता जाता नहीं है। सालों पहले उसमें रागिनी नाम की एक लड़की अपने माता पिता के साथ रहती थी। एक रमेश नाम का आदमी काम की तलाश में शहर से आता है। वो रागिनी को अपने प्यार के जाल में फंसाकर उससे शादी कर लेता है और उसकी हवेली का सारा सामान लूटकर, उसके मां बाप को मार डालता है और वापस शहर चला जाता है।

रागिनी यह सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाती। एक तरफ मां बाप के मरने का ग़म तो दूसरी तरफ पति के बिछड़ने का सदमा। रागिनी अपने होश-व-हवास खो बैठती है। वो अपने मां बाप की अर्थी पर सफेद साड़ी पहनकर लाल सिंदूर लगाए बैठी रहती है और अपने पति का इंतज़ार करती है। अपने मां बाप की अर्थी जलने के बाद वो हवेली आती है और रमेश का इंतज़ार करते करते एक दिन खुद को उस हवेली में ही जला लेती है। तबसे लेकर आज तक रागिनी की चीखें उस हवेली में गूंजती रहती हैं”।

इतना सुनकर रमेश और बिरजू बौखला जाते हैं और फिर दोनों एक दूसरे को देखते हैं। इतने में दलबीर उन दोनों के लिए किचन से खाना लेने चला जाता है। रमेश और बिरजू उस जंगल से जल्द से जल्द बाहर निकलने की बातें करते हैं। वो रात उनके लिए सदियों से कम नहीं थी। जैसे तैसे रात गुजारने के बाद रमेश और बिरजू सुबह जंगल से निकलने की तैयारी कर लेते हैं।

रमेश और बिरजू सुबह अपने घर के लिए तो निकल जाते हैं, लेकिन उनका रास्ता जैसे खत्म ही नहीं होता। जंगल के रास्ते में रमेश को हर जगह रागिनी ही रागिनी दिखाई देती है। जैसे रागिनी रमेश को बुला रही हो…रमेश मेरे पति आओ मेरे पास, रमेश मेरे पति आओ मेरे पास। रागिनी की आत्मा बुरी तरह से रमेश के पीछे पड़ जाती है और उसे अपनी तरफ आकर्षित करती है। उसे रमेश में अपना पति रमेश दिखाई देता है, और वो यह सब करके उसे पाना चाहती है।

बेतहाशा भागते भागते बिरजू और रमेश हवेली के पास पहुंच जाते हैं। रागिनी की आत्मा रमेश को हवेली के अंदर खींचने की कोशिश करती है – “रमेश मेरे पति अंदर आओ, रमेश मेरे पति अंदर आओ, रमेश मेरे पति अंदर आओ”। रमेश अपना होश गंवा बैठता है और गफलत में हवेली के अंदर जाने लगता है कि तभी बिरजू उसे जोर से हिलाकर होश में लाता है और जोर से चिल्लाकर कहता है – “रमेश, रमेश होश में आओ”।

कहानी जारी है, अगले सफ़े पे