दर-ए-इश्क़: मोहब्बत और खौफ़ की दास्तान
लखनऊ की रहस्यमयी हवेली, सुर्खाब की रूह और आशेर की मोहब्बत की ऐसी दास्तान, जहां इश्क़ और खौफ़ आमने-सामने खड़े हैं।

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा
तहखाना धीरे-धीरे गिरने लगा। यूसुफ़ ने आशेर को खींचकर बाहर निकाला। हवेली से बाहर आते ही, वह उसकी हद से दूर भागे, एक धमाका हुवा और वे दोनों जमीन पर गिर पड़े। पीछे मुड़कर देखा, तो पूरी हवेली धूल में बदल चुकी थी। पर अब सब कुछ सही था। जो उस जगह के मनहूसियत थी वह ख़तम हो गयी थी। चारो तरफ सुकून और ताज़गी थी। आशेर के दिल पर अब कोई बोझ नहीं था। उसके दिल में अब भी सुर्खाब की मौजूदगी का एहसास था। वह उसकी रूह का हिस्सा बन चुकी थी।
“अब क्या होगा, आशेर?” यूसुफ़ ने थकी हुई आवाज़ में पूछा।
आशेर हस्ते हुवे बोला “पता नहीं भाई, पर लगता है ये मोहब्बत की नई शुरुआत है।”
मोहब्बत और कुर्बानी की इस कहानी में, सच्चे इश्क़ ने हर खौफ को मात दी। लेकिन हर मोहब्बत अपने साथ नए इम्तिहान लाती है।