तेरी उल्फत में | वह पहला दिन और ज़िंदगी भर की दोस्ती की शरुवात! | क़िस्त 01
अर्सलान और कशिश की पहली मुलाकात से शुरू होती एक कहानी, जहाँ घमंड, नफरत, दोस्ती और बदलते रिश्तों के बीच एक अनोखा सफर शुरू होता है।

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा
राज फिर एक साँस ले के बोला “अर्सलान , मैं तुम्हे इन सब का नाम बताता हूँ, यह चश्मिश जो दिख रहा है, इसका नाम तो साहिल है, पर इसको हम न्यूटन कहते है, जनाब बहुत बड़े पढ़ाकू हैं। इसके साथ बैठी जो ख़तरनाक सी बंदी है इसका नाम हिना है. इसका नाम हीना है, और इसका फॅवुरेट टाइम पास लड़ना है, लड़ने का बहाना चाहिए.”
तभी राज के चेहरे पर एक पेपर बॉल पड़ा. इस पर वो बोला “ देखा मिल गया ना इसको मौका. कॉलेज मे कोई लड़ाई हो इसको साथ ले जाना. लोग ऐसे ही भाग जाएँगे. इसके बगल मैं बैठा बंदा है रोहित. इसको पढ़ने से कोई मतलब नही रहता, यह सिर्फ़ खाता है, सोता है और जिम मे पाया जाता है, देखो अभी भी यह छोले कुलचे ही खा रहा है.”
तभी पीछे से एक लड़की की आवाज़ आई, “राज मुझे भूल गये?”
राज बोला “नही आप दिखी नही ना। हाँ तो भाई, मोहतरमा का नाम है सना। पर हम कहते हैं इनको, लेडी गूगल। इनको दुनिया की सारी खबर रहती है, कोई इश्यू हो कोई ज़रूरत हो, बस एग्ज़ॅम के पेपर्स को छोड़ कर सब इनके दरबार में सॉल्व हो जाते हैं। ”
अर्सलान बारी बरी सब से मिला. सब ने गरम्जोशी से उसका वेलकम किया. फिर अर्सलान ने बताया अपने बारे मे . और राज से बोला की “राज अपने बारे मे भी तो बता दो.”
इसपर हिना बोली “अरे इसके बारे में, मैं बताती हूँ. यह एक नंबर का फालतू इंसान है. बेढंगा. कोई काम वक़्त पर ना करने वाला.सिर्फ़ यहाँ वहाँ घूमता रहता है.”
इस पर सब हसने लगे और राज ने एक पेपर बॉल उठा कर हिना को मारा.
थोड़ी देर इधर उधर की बातों के बाद, राज बोला “यार अर्सलान तुम दूसरे शहेर से आए हो कोई दिक्कत हो तो बताओ. कोई शरम ना करना. ”
इस पर अर्सलान बोला “ हाँ एक ज़रूरत है. मैं हॉस्टिल मे नहीं रहना चाहता. असल मैं स्टडीस के साथ कोई जॉब भी करना चाहता हूँ. हॉस्टिल मे तो पासिबल नही हैं.”
राज बोला “परेशान ना हो, लेडी गूगले जी की शरण में चले जाओ. सना , अपना नेटवर्क का इस्तेमाल करिए.”
सना बोली “अर्सलान, कल तक तुम्हारा काम हो जाएगा। वैसे मैं तो हॉस्टल में ही सेटिंग करवा सकती हूँ. यहाँ के वार्डन अच्छे हैं। पार्ट टाइम जॉब के लिए मन नहीं करेंगे।
अर्सलान बोला “शुक्रिया सना। बस जॉब करने को मन न करें तो हॉस्टल ही सही रहेगा।”
साना बोली “शुक्रिया रखो अपने पास, हम दोस्तों के बीच यह सब नही चलता. इस बात का ध्यान रखना.”
इस पर सब हॅसने लगे. इसी तरह पूरा दिन निकल गया, और अर्सलान सब से अलग हुवा, न्यूटन उसके साथ हो लिया, क्यों की वो भी हॉस्टिल मैं रहता था. दोनों एक साथ बात करते हुवे चल दिए।
कॉलेज राइवलरी
कहानी जारी है, अगले सफ़े पे