तेरी उल्फत में | वह पहला दिन और ज़िंदगी भर की दोस्ती की शरुवात! | क़िस्त 01
अर्सलान और कशिश की पहली मुलाकात से शुरू होती एक कहानी, जहाँ घमंड, नफरत, दोस्ती और बदलते रिश्तों के बीच एक अनोखा सफर शुरू होता है।

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा
वो सब अरसलान के गुस्से को देखकर डर कर वहां से भाग लिए। कशिश बस वहां पर खड़ी रह गई। अरसलान ने ज़ैन को एक तरफ़ किया। फिर साहिल से कहा “चलो साहिल, ये बड़े लोग हम लोगों की तरह खाने में अनाज, सब्जी और गोश्त नहीं खाते, ये ब्रेड बटर के बने हुए लोग हैं, और सिर्फ झुंड में ही रहते हैं। अकेले इनके बस का कुछ भी नहीं होता।
फिर वो कशिश से मुखातिब हुआ “मोहतर्मा बिना वजह चीजो को तूल न दीजिए। मैं यहां लड़ने के लिए नहीं आया हूं। और हां एक और बात इंसान छोटा या बड़ा अपने कर्म से होता है। फाइनेंशियल स्टेटस से नहीं। आपका कार्टून नीचे पड़ा काफी देर से ज़मीन सूंघ रहा है। देखिये उसे आप।”
इतना कह कर वो दोनो, हॉस्टल की तरफ चल पड़े। कशिश उसे ज़हर बुझी निगाहों से घूरती रही।
हॉस्टल में अरसलान अपने रूम में पहुंचा, और अपनी किताबें एक तरफ रख कर अपने बिस्तर पर आराम करने के लिए लेट गया। अभी वह थोड़ी देर ही लेटा था कि उसके दरवाजे पर दस्तक हुई। अरसलान दरवाजा खोलने के लिए अपने बिस्तर से उठा। जब उसने दरवाजा खोला तो न्यूटन अपना सामान लिए वहां पर खड़ा था। दरवाजा खुलते ही वह अंदर रूम में दाखिल हो गया।
दूसरे बिस्तर पर बैठे हुए वह अरसलान से बोला, “यार तुम्हारे रूम के दूसरे बंदे का तो अभी कोई भी आता-पता नहीं है। तो इसलिए मैंने सोचा कि क्यों न मैं तुम्हारा रूम शेयर कर लूं। इसलिए मैंने हॉस्टल के मैनेजर से बहुत रिक्वेस्ट की, तो उन्होंने मुझे तुम्हारे साथ इस रूम में शिफ्ट कर दिया। अब कम से कम इस बात की तसल्ली है कि हम लोग एक साथ एक रूम में रहेंगे तो कोई तुम्हें परेशान नहीं कर पाएगा।”
इस पर अरसलान न्यूटन से बोला “मुझे या फिर तुम्हें कोई परेशान नहीं करेगा।”
न्यूटन बोला “यार एक ही बात है न। जब तक तुम यहां पर इस कॉलेज में हो, तब तक हम दोनों एक साथ एक ही रूम में रहेंगे। ठीक है न? अरसलान बोला ठीक है।”
फिर दोनो ने आपस में बैठकर काफ़ी बातें की और उसके बाद एक साथ मिलकर अपने कमरे को सही किया। और फिर दोनों डिनर के लिए बाहर चले गए।
क्लास में सब बैठे थे कि मिस्टर शर्मा दाखिल हुए। मिस्टर शर्मा ने क्लास को देखा। अरसलान के साथ न्यूटन बैठा था। मिस्टर शर्मा बोले “कशिश अपनी जगह से उठो, और अरसलान के पास बैठो। यहां सामने बैठोगी तो नजर में रहोगी। न्यूटन तुम जरा, राज के साथ बैठो।”
कशिश न चाहते हुए भी अरसलान के पास बैठ गई। अरसलान ने उसकी तरफ देखा तक नहीं। पर कशिश उसे खा जाने वाली नजरों से देख रही थी। अरसलान ने पूरी क्लास में उसपर तवज्जो ना दी, जब क्लास खत्म हुई। अगली टीचर मिस रूबी दूर पर आ गई। मिस्टर शर्मा ने मिस रूबी को ग्रीट किया और कहा “आइए मैडम, माफ़ी चाहता हूं कि क्लास थोड़ी लंबी खिंच गई।”
कहानी जारी है, अगले सफ़े पे