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तेरी उल्फ़त में

तेरी उल्फत में | वह पहला दिन और ज़िंदगी भर की दोस्ती की शरुवात! | क़िस्त 01 

अर्सलान और कशिश की पहली मुलाकात से शुरू होती एक कहानी, जहाँ घमंड, नफरत, दोस्ती और बदलते रिश्तों के बीच एक अनोखा सफर शुरू होता है।

कॉलेज में पहली बार आमने सामने अर्सलान और कशिश

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा

मिस रूबी बोली “अरे नहीं सर, कोई बात नहीं, वैसे कैसी गई आपकी क्लास, सब पुराने स्टूडेंट्स है या कुछ नए भी हैं।”

“जी सिर्फ़ एक लड़का नया है, काफ़ी हुनहार है। मुझे उम्मीद है कि अच्छा करेगा, वैसे मैंने कशिश को आज उसके साथ बैठा दिया है, ताकि वह अपने पुराने दोस्तों के साथ मिलकर क्लास में तफरीह न करती रहे।” मिस्टर शर्मा ने जवाब दिया।

मिस रूबी बोली “आपने बिल्कुल बाजा फरमाया। मैं खुद इससे और कुछ स्टूडेंट्स से परेशान हूं।”

फिर वह अंदर आ गई। कशिश उठकर अपनी जगह जाने को हुई तो मिस रूबी ने उसे रोका और कहा “कशिश तुम यहीं बैठो।” कशिश फिर मन मारकर बैठ गई।

ममता की छांव!

मिस रूबी क्लास से मुखातिब हुई, “मैं आपको इंडस्ट्रियल आर्ट्स का मॉड्यूल पढ़ाऊंगी। यह मॉड्यूल बहुत इंट्रेस्टिंग होता है। जब आगे चल कर आप लोग बड़े बड़े प्रोजेक्ट्स करेंगे तो आपके काफ़ी काम आएगा, जो आपने यहाँ सीखा। लेकिन आज क्योंकि यह पहली क्लास है, तो मैं कोर्स से हट कर आप को एक वर्क देती हूं। आप सब एक ऐसी तस्वीर बनाइए जो आपके दिल के करीब हो। कुछ ऐसा जो आप शिद्दत से पाना चाहते हो। शुरू हो जाइए।”

पूरी क्लास काम में लग गई। सब कुछ न कुछ बनाने लगे। थोड़ी देर बाद मिस रूबी ने कहा “देखा जाए की आप सब ने क्या बनाया है। वह न्यूटन के पास गई, तो न्यूटन ने अपने आपको बड़े से घर के आगे खड़ा किया हुआ था। फिर रोहित की पेंटिंग में वह एट पैक एब्स बनाए हुए था। इस तरह वह एक एक करके सबकी आर्ट्स देखती हुई कशिश के पास आई। कशिश की पेंटिंग में एक सीनरी थी जो कि अधूरी थी। फिर उन्होंने अरसलान से पेंटिंग मांगी।

अरसलान ने अपनी पेंटिंग में रंग नहीं भरे थे। सिर्फ पेंसिल से एक मां-बाप और बेटे को पोर्ट्रे किया था, मां-बाप का चेहरा खाली था। सिर्फ खाका था। बेटे के चेहरे पर मुस्कान थी।

मिस रूबी बोली “यह क्या बनाया है तुमने?” तो अरसलान ने कहा, मैम “आपने कहा था कि जो मैं शिद्दत से चाहता हूं, वह पोर्ट्रे करूं। मैं यही चाहता हूं। अपने मां बाप की गोद में बैठा हूं। इन पलों को चाहता हूं मैं।”

इस पर कशिश बीच में बोली “तो जाओ और बैठो न अपने घर पर, यहां पेंटिंग किस लिए बना डाली।” और वह ज़ोर ज़ोर से हसने लगी। साथ में उसके दूसरे साथी भी हसने लगे।

मिस रूबी ने सबको डांट कर चुप किया, और अरसलान से बोली “पर आप तो बचपन में खूब खेले होंगे, आप अभी भी यही करना चाहते हैं?”

अरसलान ने बड़ी संजीदगी से जवाब दिया “मेरे मां और बाप एक एक्सीडेंट में गुजर गए। इसलिए मेरा यह अरमान अच्छे से पूरा नहीं हुआ।”

मिस रूबी काफी संजीदगी से बोली “ओह आई एम सॉरी अरसलान। मुझे पता नहीं था, प्लीज दिल पे मत लेना।”

कहानी जारी है, अगले सफ़े पे