तेरी उल्फत में | अफवाहें, मोहब्बत और दर्द का अनकहा पहलू | क़िस्त 06
न्यूटन फिर ज़बरदस्ती अपने चेहरे पे मुस्कान लाते हुए बोला “कोई बात नहीं अलविना जी। बस पता नहीं कैसे मैं ये सब आपको बता गया। खैर अब चलता हूं, मुझे ऑफिस भी जाना है। हॉस्टल में अरसलान वेट कर रहा होगा।” न्यूटन उठते हुए बोला। अलविना उसे जाते हुए देखती रही। वह यह सोच रही […]

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा
न्यूटन फिर ज़बरदस्ती अपने चेहरे पे मुस्कान लाते हुए बोला “कोई बात नहीं अलविना जी। बस पता नहीं कैसे मैं ये सब आपको बता गया। खैर अब चलता हूं, मुझे ऑफिस भी जाना है। हॉस्टल में अरसलान वेट कर रहा होगा।” न्यूटन उठते हुए बोला। अलविना उसे जाते हुए देखती रही। वह यह सोच रही थी कि कोई इतने अच्छे लड़के के साथ ऐसा कैसे कर सकता है। फ़िज़ा की वजह से न्यूटन का भरोसा ही उठ चुका है मोहब्बत से।
"उसकी नफ़रत में भी एक छिपी मोहब्बत थी,
पर वक्त ने उसे दिखाने की मोहलत दी।"

एक और दिलचस्प और रोमांचक कहानी पढ़िए!
लखनऊ की एक पुरानी हवेली का राज़
लखनऊ के पुराने मोहल्ले में एक हवेली थी जिसे लोग “दर-ए-मोहब्बत” कहते थे। इस हवेली की दीवारों पर वक़्त की गर्द जम चुकी थी, लेकिन इसके हर कोने में किसी की इंतजार करती खामोशी गूंजती थी। हवेली की कहानियां लोगों की जुबां पर थीं, लेकिन उस खौफ के साथ जिसे सुनकर रूह कांप जाती थी। कहते थे कि वहां एक रूह, सुर्खाब, का साया है, जो अपनी अधूरी मोहब्बत के दर्द में कैद है।
आशेर, एक होशियार और जुनूनी नौजवान, देहली यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के बाद छुट्टियों में लखनऊ आया। बचपन से वह पुरानी इमारतों और उनकी कहानियों से मोहब्बत करता था। उसे हमेशा यकीन था कि हर दास्तान के पीछे एक सच्चाई होती है। हवेली के बारे में सुनकर, उसका दिल बेचैन हो गया।
“आशेर, इस हवेली से दूर रहो। ये कोई आम जगह नहीं है।”
उसके दोस्त यूसुफ़ ने समझाने की कोशिश की।
“डर और सच के बीच का फासला बस हिम्मत है, यूसुफ़। मैं इसे देखना चाहता हूं।”
यूसुफ़ ने मना किया, लेकिन आशेर ने ठान लिया कि वह हवेली के अंदर जाएगा।
चांदनी रात थी, जब आशेर और यूसुफ़ हवेली के पास पहुंचे। हवेली के बड़े, जर्जर गेट पर कुरान की आयतें और यह इबारत लिखी थी:
“इश्क़ यहां सो रहा है। उसे जगाना मत, वरना हमेशा के लिए सो जाओगे।”