होम / तेरी उल्फ़त में / तेरी उल्फत में | मेरा नाम कशिश है!..इन्तिक़ाम की एक शाम! | क़िस्त 02
तेरी उल्फ़त में

तेरी उल्फत में | मेरा नाम कशिश है!..इन्तिक़ाम की एक शाम! | क़िस्त 02

अरसलान ने मुस्कुरा के जवाब दिया “आपकी इज़्ज़त के लिए तो हम ऐसे कई ज़ख्म अपने जिस्म के ऊपर झेल सकते हैं, ज़ख़्मों की परवाह किसको है। पर आप नहीं समझेंगी ये सब।” ये कह कर अरसलान आगे बढ़ गया। कशिश उसे जाते हुए देखती रही।

तेरी उल्फत में क़िस्त 02 में कशिश और अरसलान का कॉलेज में तनावपूर्ण आमना-सामना

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा

अरसलान ने मुस्कुरा के जवाब दिया “आपकी इज़्ज़त के लिए तो हम ऐसे कई ज़ख्म अपने जिस्म के ऊपर झेल सकते हैं, ज़ख़्मों की परवाह किसको है। पर आप नहीं समझेंगी ये सब।” ये कह कर अरसलान आगे बढ़ गया। कशिश उसे जाते हुए देखती रही।