तेरी उल्फत में | मेरा नाम कशिश है!..इन्तिक़ाम की एक शाम! | क़िस्त 02
अरसलान बोला “काफ़ी बेहतर लग रहा है। बाकी तो डॉक्टर्स जानें।” “कैसे हो अरसलान?” उस आवाज़ की तरफ़ अरसलान ने देखा। सामने वह ज़ालिम खड़ी थी, अपने हसीन शफ़ाक़ चेहरे पर कातिल मुस्कुराहत लिए। हाथ में एक फूल का गुलदस्ता लिए। अरसलान ने ज़बत के साथ जवाब दिया “बस ठीक हूं। आप यहाँ कैसे?” कशिश […]

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा
अरसलान बोला “काफ़ी बेहतर लग रहा है। बाकी तो डॉक्टर्स जानें।”
“कैसे हो अरसलान?” उस आवाज़ की तरफ़ अरसलान ने देखा। सामने वह ज़ालिम खड़ी थी, अपने हसीन शफ़ाक़ चेहरे पर कातिल मुस्कुराहत लिए। हाथ में एक फूल का गुलदस्ता लिए।
अरसलान ने ज़बत के साथ जवाब दिया “बस ठीक हूं। आप यहाँ कैसे?”
कशिश बोली “कमाल करते हो अरसलान, हम एक साथ एक ही क्लास में पढ़ते हैं। मेरा इतना हक तो है न आप पर। देखो क्या हाल हुआ है तुम्हारा। अपना ख्याल रखा करो।”
शमशेर खान बोले “वैसे अरसलान बेटा क्या हुआ था?”
जवाब में अरसलान ने वही जवाब दिया जो उसने बाकी को दिया था।
जवाब सुनकर कशिश के होठों पर मुस्कुराहट खेल गई। अरसलान उसके सुर्ख होथों पर उस जहरीली मुस्कान को देखकर मुस्कुरा पड़ा।
“अच्छा तो अरसलान हम लोग चलते हैं, अपना ख्याल रखना।” मिस्टर शर्मा बोले।
“रूबी आपा, अब आप भी जाएं। मैं ठीक हूं।” अरसलान ने कहा।
“अच्छा ठीक है, अगर कोई बात हो तो फोन करना।” रूबी ने कहा। फिर वो सब चलने लगे।
तभी शमशेर खान बोले। “कशिश, अरसलान के पास एक ग्लास में पानी निकाल कर रख दो। और हां जरा कैंटीन से जाकर एक जूस का पैकेट ले आओ अरसलान के लिए। हम आपका गाड़ी में इंतज़ार करते हैं।”
कशिश न चाहते हुए भी कैंटीन की तरफ चली गई। फिर जब वह लौटी तो अरसलान अकेला था।
उसने पानी और जूस का पैकेट रखा।
अरसलान बोला “अच्छा लग रहा है, तुमसे खिदमत करवाते हुए।”
कशिश ने उसको घूर कर देखा तो अरसलान मुस्कुरा पड़ा।
कशिश जाने लगी तो अरसलान बोला “जूस ले आई हो तो एक ग्लास पिला भी देती तो सही रहता।”
कशिश ने जल भुनकर एक ग्लास जूस निकाल कर उसे देते हुए बोली “मेरा बस चले तो तुम्हें जहर पिला देती।”
अरसलान ने ग्लास पकड़ते हुए हस्ते हुए कहा “तुम्हारे हाथ लगाने से तो यह ऐसे ही जहर हो गया है। कोई और पिए तो तड़प कर मर जाता। वह तो मैं सख़्त जान हूं इसलिए बच गया। वैसे क्या देखने आई थी कि कहीं कोई कसर तो नहीं छूटी।”
कशिश बोली “अच्छा किया कि जो तुमने किसी को सच नहीं बताया। लगता है अपना अंजाम देखकर समझ आ गई। वरना बेकार में दोबारा यहां पड़े होते।”
अरसलान ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया “कशिश मुझे पता चला है कि जिस बॉटल से तुमने मुझे मारा था वह पुलिस को मिल गई। और वो उसके फिंगर प्रिंट्स मिला रहे हैं। कुछ लोगों के बयान से तुम्हारा भी नाम शक के दायरे में है। अब मैं बोलूं या न बोलूं, पुलिस तो तुमसे मिलने आएगी। अब तुम तो बस ज़ैन के पास जाने की तैयारी कर लो।”
कशिश के चेहरे का रंग बदल गया वह बोली “ये..ये सच नहीं है।”
कहानी जारी है, अगले सफ़े पे