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तेरी उल्फत में | मेरा नाम कशिश है!..इन्तिक़ाम की एक शाम! | क़िस्त 02

अरसलान ने इतमीनान से जूस पीते हुए कहा “क्यों नहीं हो सकता। गुनाह छुपता तो है नहीं। वैसे अब पता नहीं कब तुमसे मिलना हो, लेकिन जेल में मैं जरूर आऊंगा। मेरा भी हक है इतना। वैसे इस अनार के जूस के लिए शुक्रिया। बिल्कुल सुर्ख है खून की तरह और तुम्हारे होंठों की तरह। […]

तेरी उल्फत में क़िस्त 02 में कशिश और अरसलान का कॉलेज में तनावपूर्ण आमना-सामना

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा

अरसलान ने इतमीनान से जूस पीते हुए कहा “क्यों नहीं हो सकता। गुनाह छुपता तो है नहीं। वैसे अब पता नहीं कब तुमसे मिलना हो, लेकिन जेल में मैं जरूर आऊंगा। मेरा भी हक है इतना। वैसे इस अनार के जूस के लिए शुक्रिया। बिल्कुल सुर्ख है खून की तरह और तुम्हारे होंठों की तरह। ”

कशिश की हालत खराब थी। वह बोली “अरसलान क्या सच में पुलिस मुझे ले जाएगी?”

“हां, इसमें नई बात क्या है, अटेंप्ट टू मर्डर का केस बनेगा। कम से कम 10 साल।” कशिश और परेशान हो गई।

तब अरसलान बोला “तुम्हे पता है मैंने की को सच क्यों नहीं बताया! इस लिए नहीं बताया क्यूंकि तुम एक बुजदिल हो और बुजदिल की सजा तो खुद उसका खौफ़ होता है। तुमको तो वैसे ही इतना खौफ़ है, फिर मैं और क्या सजा दूँ तुम्हें। जाओ, आराम करो और सुकून की सांस लो, मैंने अभी जो कुछ कहा सब झूठ है। कोई पुलिस नहीं आने वाली, कुछ नहीं होने वाला तुम्हे।”

कशिश गुर्रा कर आगे बढ़ी “मैं तुम्हारा खून पी जाऊंगी अरसलान।” यह कह कर वह आगे बढ़ी तो लड़खड़ा कर अरसलान पर जा गिरी। अरसलान ने उसके चेहरे को देखा, गुस्से से लाल हो रहा था, पर उसके चेहरे पे गुस्सा भी ख़ूबसूरती ही बिखेर रहा था। उसके घने काले बाल महक रहे थे। सुर्ख होंठ जो उसके अरसलान के चेहरे के काफ़ी पास थे।

दोनों की सांसें एक दूसरे के चेहरे से टकराने लगीं। पहली बार अरसलान ने उसकी खूबसूरती को निहारा। उसकी झील जैसी आंखों में देखते हुए बोला “अब क्या सच में मेरा खून पीना है। किसी ने देख लिया तो क्या समझेंगे। यही कि तुमको इतना भी सब्र नहीं है। अब मैं ज़्यादा देर तुमको नहीं बर्दाश्त कर सकता। अगर कहीं मैं दर्द से चीख पड़ा तो इस बार तुम पक्का फंसोगी।”

कशिश हड़बड़ा के अलग हुई और बोली “निहायत बदतमीज शख्स हो तुम। तुम्हें देख लूंगी मैं।” कशिश पलट कर जाने लगी।

अरसलान ने हंसते हुए बोला। “कल फिर आना। हो सके तो एक जूस का पैकेट लेती आना। साथ में अपने घर से कुछ पका के भी लेती आना। साथ मिलकर खाएंगे। ”

कशिश उसे घूरते हुए कमरे से निकल गई। गुस्से से उसका चेहरा सुर्ख हो गया था। उसे अरसलान पर तेज गुस्सा आ रहा था।

अरसलान ने फिर हंसते हुए कहा “जालिम पलट कर आना ज़रूर।” फिर कशिश नहीं रुकी।


ज़ख़्मों की परवाह किसको है!

कुछ दिन बाद अरसलान हॉस्पिटल से डिस्चार्ज हुआ। सब दोस्तों के साथ रूबी ने उसे अपने घर बुलाया। वो उसकी सलामती के लिए बहुत खुश थे। इसलिए उन सबने मिलकर एक छोटी सी दावत की थी। सब दोस्त रूबी के घर पर मौजूद थे। वहां पर काफी अच्छा माहौल था। मिस्टर शर्मा और शमशेर खान को भी उस दावत में बुलाया गया था। कशिश भी न चाहते हुए वहां आई थी। सब काफ़ी खुश थे उस दिन। अरसलान भी बहुत खुश था।

कहानी जारी है, अगले सफ़े पे