तेरी उल्फत में | मेरा नाम कशिश है!..इन्तिक़ाम की एक शाम! | क़िस्त 02
अरसलान बोला, “ये जो चाकू-छुरियां तुम दिखाकर हमको डरा रहे थे, एक गलती कर गए। अभी तक तुम लोगों का सामना मर्दों से नहीं हुआ। ये चाकू-छुरियां कोई भी रख लेता है, पर उसे किसी मर्द के आगे चलाना, तुम जैसे गिरे हुए लोगों के बस का नहीं। देख लो अपना हाल।” राज बोला “चलो […]

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा
अरसलान बोला, “ये जो चाकू-छुरियां तुम दिखाकर हमको डरा रहे थे, एक गलती कर गए। अभी तक तुम लोगों का सामना मर्दों से नहीं हुआ। ये चाकू-छुरियां कोई भी रख लेता है, पर उसे किसी मर्द के आगे चलाना, तुम जैसे गिरे हुए लोगों के बस का नहीं। देख लो अपना हाल।”
राज बोला “चलो चला जाए। कूड़ा उठाने के लिए अब क्या रुकना।”
अरसलान बोला “रुको राज, वैसे ही इन लोगों की कोई इज्जत नहीं है, पर इनको पता चलना चाहिए की लड़की की इज्जत क्या होती है जो ये लोग सारे आम रोज उतारने की कोशिश करते हैं।”
रोहित बोला “अब क्या करना है? इतनी मार तो शायद इनके मां-बाप ने भी नहीं मारी होगी।”
अरसलान बोला “देखते जाओ, पर पहले इन नमूनों को बांध दो एक साथ, इस पेड़ से, जिसके नीचे ये अपना अड्डा बनाए हुए हैं।”
राज बोला “रस्सी कहाँ से लाए?”
न्यूटन बोला “इनकी शर्ट्स जो फट गई है, किस दिन काम आएगी?”
फिर क्या था आनान फानन में वो लड़के पेड़ से बंधे थे। फिर अरसलान ने उनके चाकू को उठाया, और उनके पास जाकर बोला “इसका एक इस्तेमाल मैं तुम्हें दिखाता हूं।”
फिर अरसलान ने उसी चाकू से उनका सर गंजा करना शुरू किया। उसे देख बाकी भी जुट गए। कुछ देर के बाद सब के सर गंजे थे और जिनकी मूंछें थीं, वो आधी थीं।
न्यूटन बोला “यार जरा सा मेकअप कर देते हैं।” फिर वो उन्हीं की बाइक्स का ग्रीस निकालकर, उनके चेहरे पर मलने लगा।
तभी वहां हिना और सना भी कुछ दूसरे स्टूडेंट्स के साथ आ गईं। उन लफंगों का ये हाल देखकर सब हसने लगे। तबी वहां से ज़ैन और कशिश कार से गुज़रे। ये देख वो लड़के चिल्लाने लगे “ज़ैन हमें छुड़ाव।” पर ज़ैन इतने सारे लोगों को देख वहां से चला गया। कशिश अरसलान को घूरती रही। उसका खूबसूरत और गुलाबी चेहरा और लाल होता चला गया।
ये देख अरसलान बोला “लो देख लो जिसका तुम दम भर रहे थे वो तो खुद भाग गया। ये सुन बाकी सब हसने लगे।” फिर अरसलान और बाकी लोग भी वापस आ गए।
दोस्ती और जज़्बात
थोड़ी के देर बाद वो सब एक साथ कैंटीन में बैठे हुए थे। सना ने अरसलान और सबसे कहा, आज मुझे तुम सबकी दोस्ती पर बहुत ज़्यादा फख्र महसूस हो रहा है। अरसलान, राज, रोहित और न्यूटन मैं तुम लोगों का किस मुंह से शुक्रिया अदा करूं कह नहीं सकती। आज तुम लोगों ने जो हमारे लिए किया है, उसका बदला हम दोनों चाहकर भी नहीं पूरा कर सकते।
हिना बोली हम दोनों के लिए तुम सब उन लफंगो से भिड़ गए। उन्हें सबक सिखाया। तुम्हें थोड़ी भी अपनी जान तक की फ़िक्र ना थी, थैंक्स गायिज़। थैंक्स अ लॉट। कोई और होता तो कभी हमारे लिए इतना नहीं करता, जितना तुम लोगों ने हमारे लिए किया है। इतना कहते ही उन दोनो की आंखें आंसुओं से नम होती चली गईं, और गला रुंध गया। और दोनों एक दूसरे की तरफ देखने लगीं।
कहानी जारी है, अगले सफ़े पे