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तेरी उल्फत में | मेरा नाम कशिश है!..इन्तिक़ाम की एक शाम! | क़िस्त 02

मिस्टर शर्मा बोले “सर बाहर एक पुलिस इंस्पेक्टर और दो कांस्टेबल खड़े हैं, ज़ैन के लिए। पुलिस लॉकअप में एक लड़के ने कहा है कि ये सब उन्होंने ज़ैन के कहने पर किया है। ज़ैन को कस्टडी में लिया जा रहा है। ज़ैन ने अरसलान और उसके दोस्तों को परेशान करने के लिए उन लड़कों […]

तेरी उल्फत में क़िस्त 02 में कशिश और अरसलान का कॉलेज में तनावपूर्ण आमना-सामना

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा

मिस्टर शर्मा बोले “सर बाहर एक पुलिस इंस्पेक्टर और दो कांस्टेबल खड़े हैं, ज़ैन के लिए। पुलिस लॉकअप में एक लड़के ने कहा है कि ये सब उन्होंने ज़ैन के कहने पर किया है। ज़ैन को कस्टडी में लिया जा रहा है। ज़ैन ने अरसलान और उसके दोस्तों को परेशान करने के लिए उन लड़कों को पैसे भी दिए थे।”

मिस्टर शमशेर गुस्से से बोले “ये सब क्या है ज़ैन ? कशिश तुमने तो हमें कोई और कहानी बताई थी। यहां तुम्हारे दोस्त सरे आम लड़कियों से बदतमीजी कर रहे हैं, और तुम हमें कुछ और बता रहे हो। ऐसे लड़कों के साथ उठना बैठना है तुम्हारा।”

मिस्टर शर्मा बोले “शमशेर साहब आपसे भी इंसान पहचानने में धोखा हो गया। जिन लड़कों को अभी आप सजा दिला रहे थे, वो मेरी क्लास के अच्छे स्टूडेंट्स में गिने जाते हैं।”

शमशेर खान बोले “आज हमसे कितना बड़ा गुनाह होते होते बचा है। हमको शर्म इस बात की है कि हमारी बेटी तक ने हमसे झूठ बोला। कशिश हमें यह उम्मीद न थी आपसे। सर शर्म से झुका दिया आपने हमारा।”

तभी वहां पुलिस आ जाती है, और ज़ैन को कस्टडी में ले लेती है। फिर प्रिंसिपल कहते हैं “आज जो हुआ उसने मेरा भी सर शर्म से झुका दिया। आप सब लोग अब जाइए। जो कुछ हुआ उसके लिए मैं माफी चाहता हूं।”

अरसलान बोला “इसमें माफ़ी की कोई बात नहीं है। हालात ऐसे बन गए थे। बस सर आपसे एक गुजारिश है कि, आप ईव टीजिंग के बारे में कुछ करिए।”

प्रिंसिपल बोले “हां जरूर करना है, और अब तुम लोगों से मिलकर ही इसका रास्ता निकालूंगा।” फिर वो सब बाहर आ गए।

मेरा नाम कशिश है!..इन्तिक़ाम की एक शाम!

अरसलान ने सोचा कि जाने से पहले लाइब्रेरी होता हुआ चलूं, वहां से उसे कुछ किताबें लेनी थी। अरसलान लाइब्रेरी जा ही रहा था कि रास्ते में कशिश ने उसका रास्ता रोक लिया।

कशिश बोली “जब से तुम यहां पर आए हो, तुमने हमको काफ़ी परेशान किया हुआ है। पहले किसी की इतनी हिम्मत नहीं हुआ करती थी कि हमको या ज़ैन को कोई कुछ कह भी सके। लेकिन जिस दिन से तुम यहां पर आए हो। बराबर हमारा रास्ता काट रहे हो। आज तुम्हारी वजह से ज़ैन की इतनी जिल्लत हुई है। हमको हमारे पापा के सामने शर्मिंदा करवा दिया तुमने। इसका बदला हम तुमसे जरूर लेंगे। इन सबका हिसाब जरूर देना होगा तुमको।”

कहानी जारी है, अगले सफ़े पे