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तेरी उल्फत में | मेरा नाम कशिश है!..इन्तिक़ाम की एक शाम! | क़िस्त 02

इतने में अरसलान बोला “वह यार कमाल करती हो तुम दोनों भी। तुम लोगों ने ही उस दिन मुझसे कहा था कि हम लोगों के बीच कभी भी कोई थैंक्स या सॉरी जैसे शब्द इस्तेमाल नहीं होंगे। और आज तुम लोग ही ऐसी बातें कर रही हो। यह तो गलत बात है न। तुम दोनों […]

तेरी उल्फत में क़िस्त 02 में कशिश और अरसलान का कॉलेज में तनावपूर्ण आमना-सामना

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा

इतने में अरसलान बोला “वह यार कमाल करती हो तुम दोनों भी। तुम लोगों ने ही उस दिन मुझसे कहा था कि हम लोगों के बीच कभी भी कोई थैंक्स या सॉरी जैसे शब्द इस्तेमाल नहीं होंगे। और आज तुम लोग ही ऐसी बातें कर रही हो। यह तो गलत बात है न। तुम दोनों थैंक्स बोलकर हमारी दोस्ती के रूल्स तोड़ रही हो। और हम लोगों ने कोई भी ऐसा बड़ा काम तो किया नहीं, बस वही किया जो सही था। और आगे भी वही करेगें जो सही रहेगा। इसलिए तुम दोनों कभी भी खुद को अकेला नहीं समझना, ठीक है?।”

हिना और सना मुस्कुराते हुए बोली “ठीक है, अगली बार से ऐसा कभी नहीं होगा”।

रोहित बोला “हां यार, और मेरी बॉडी भी तो काफी टाइम से जंग खा रही थी, कल सपने में मेरे अर्नोल्ड अंकल और सलमान भाई आए थे और कहने लगे कि यह बॉडी किसी काम भी ले आ। वो दोनों मुझसे बहुत ज़्यादा नराज थे। अब मैंने अपनी बॉडी का सही यूज़ किया है, इसी बहाने अब वो भी खुश हो गए होंगे।”

न्यूटन बोला “हां इसी बहाने मुझे भी थोड़ा हीरो गिरी करने का मौका मिल गया, वरना बार-बार ऐसा मौका कहां मिलता है, है न राज।” राज ने भी हां में हां में हां मिलाई।

फिर राज बोला “यार आज हमने तुम लोगों का बदला लिया है। अगर कभी भी कुछ लड़कियां हम जैसे स्मार्ट बंदो को छेड़ें तो तुम लोग भी बदला उतार देना।” इस पर सब लोग खुशी से खिलखिला कर ज़ोर-ज़ोर से हंसने लगे।

तभी वहां पर गुस्से में कशिश पहुंची। और गुर्रा कर बोली “अरसलान खान, तुमने और तुम्हारे दोस्तों ने आज जो किया है, वह बिल्कुल भी अच्छा नहीं किया। यह तुम लोगों ने खुले आम हम लोगों से लड़ाई मोल ले ली है। अब जल्द ही तुम सब इसका अंजाम भुगतने के लिए इंतजार करो। तुम अपने आपको बहुत स्मार्ट समझते हो न, तुम्हें लगता है कि तुम अपनी स्मार्टनेस से सब कुछ हासिल कर लोगे तो यह तुम्हारी गलतफहमी है। तुम्हारा सारा घमंड हम एक बार में ही चूर चूर कर देंगे, इतना याद रखना तुम।”

अरसलान बोला “मोहतरमा, हमने जो भी किया वह बिल्कुल सही किया, कोई भी शरीफ इंसान होता तो वह भी वही करता, जो हम लोगों ने किया। और रही बात अंजाम की, तो किसके भरोसे पर आप इतना दम भर रही हैं, उस कार्टून के भरोसे पर। जिसमें इतनी हिम्मत तक नहीं कि वह यहां हमारे पास खुद आ पाता, उल्टा आपको भेज दिया, हमसे भिड़ने के लिए। हमें धमकी देने का कोई फायदा नहीं है, जाओ आप अपने कार्टून को समझाओ जिसने गलत काम किया है।”

कशिश ने फिर से दहाड़ लगाई “हमको किसी के सहारे की जरूरत नहीं है, हम खुद तुम्हारी इस हरकत का मुंह तोड़ जवाब देंगे। तुम तो बस अब इंतजार करो, अरसलान, इंतजार करो।” फिर वह वहां से पैर पटकती हुई चली गई। अरसलान उसे मस्कुराते हुए देखता रहा।

इंसान की शक्सियत और किरदार

कहानी जारी है, अगले सफ़े पे